Friday, June 21, 2013

Wednesday, June 19, 2013





Mix-media drawing by Akshay Ameria / 2013


इस दौर में जो हँस रहा है
हादसों की ख़बर उस तक नहीं पहुंची है .
जो खुश है वो या तो डरा हुआ है
या खुद किसी जुर्म में शामिल है.
यह एक ऐसा दौर है
जिसमें मारा जायेगा वो ही जो बेगुनाह है.

फिल्म "मोहनदास" के संवाद की पंक्ति .
निर्देशक : मजहर कामरान / २००९

Tuesday, June 18, 2013

Monday, June 17, 2013

Sunday, June 16, 2013

"Looking Back" by Akshay Ameria, Mix-media on paper / 2012.

Monday, March 25, 2013

















Pen & Ink drawing on paper. - Akshay Ameria

अँधेरा...

अँधेरा,
इतना घना, इतना गहरा,
और भेदती हो उसको उसकी प्रार्थना,

जैसे कवच पहनाती हो उसे,
और अँधेरा महसूस होता हो जैसे कोई गुफा,
आदिम, खामोश, खुंखार,
और चमकते हों कवच उसके,

जैसे बताते हों शत्रु को पता उसका,
लपकते हों अस्त्र, शिकारी हो अँधेरा,

टटोलते उसे,
भरते हुए कोटरों में प्रार्थनाएं,
पूजनीय तत्त्व,
जगाना असाध्य उर्जा,
अदृश्य शक्ति,

प्रार्थना नहाते भी,
और नहाना भी अँधेरे में,
घुप्प कर अँधेरा,

बुझाकर सारी दिया बाती,
ये तो परंपरा नहीं,

लेकिन परंपरा है,
नहाते हुए भजने का उसका नाम,

परंपरा है, प्रार्थना की,
निष्कवच।

- पंखुरी सिन्हा